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पश्चिम एशिया संकट पर PM मोदी की हाईलेवल मीटिंग, खाद, तेल, गैस संकट को लेकर मंथन, जानें डिटेल्स

 Reported By: Devendra Parashar Edited By: Niraj Kumar
 Published : Mar 22, 2026 09:37 pm IST,  Updated : Mar 22, 2026 10:02 pm IST

पीएम मोदी ने आज सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति (सीसीएस) बैठक की। इसमें पश्चिम एशिया में उपजे हालात और भारत पर पड़ने वाले प्रभावों को कम करने के लिए ठोस रणनीति पर चर्चा की।

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सीसीएस की बैठक में पीएम मोदी Image Source : REPORTER INPUT

नई दिल्ली:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में ईरान अमेरिका और इजरायल के बीच जारी संघर्ष की पृष्ठभूमि में हालात की समीक्षा और उससे निपटने के उपायों पर चर्चा के लिए मंत्रिमंडल की सुरक्षा समिति (CCS) की बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में आवश्यक वस्तुओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अल्पकालिक, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। किसानों के लिए उर्वरकों की भविष्य में निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु उर्वरकों के वैकल्पिक स्रोतों पर भी विचार किया गया।

नए निर्यात बाज़ार विकसित करने पर विचार

साथ ही बैठक में रसायन, औषधि, पेट्रोकेमिकल तथा अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के लिए आवश्यक आयात के स्रोतों में विविधता लाने के लिए कई उपायों पर चर्चा हुई। भारतीय वस्तुओं को बढ़ावा देने के लिए निकट भविष्य में नए निर्यात बाज़ार विकसित करने की योजना पर भी विचार किया गया।

कैबिनेट सचिव ने दिया प्रेजेंटेशन

कैबिनेट सचिव ने वैश्विक हालात पर एक डिटेल्ड प्रेजेंटेशन दिया  और भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों द्वारा अब तक उठाए गए तथा आगे अपनाए जाने वाले उपायों की जानकारी दी। बैठक में कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, पेट्रोलियम, बिजली, एमएसएमई, निर्यातक, शिपिंग, व्यापार, वित्त, आपूर्ति श्रृंखला तथा अन्य प्रभावित क्षेत्रों पर संभावित प्रभाव और उनसे निपटने के उपायों पर चर्चा की गई। देश की समग्र मैक्रो-आर्थिक स्थिति और आगे उठाए जाने वाले कदमों पर भी विचार-विमर्श हुआ।

खाद्य, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा पर चर्चा

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अल्पकालिक, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक प्रभावों तथा भारत पर उसके संभावित असर का आकलन किया गया। इस संदर्भ में तत्काल और दीर्घकालिक दोनों प्रकार के प्रतिरोधात्मक उपायों पर चर्चा हुई। आम नागरिकों की आवश्यक जरूरतों, जैसे खाद्य, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा, की उपलब्धता का विस्तृत आकलन किया गया। जरूरी वस्तुओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अल्पकालिक, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।

उर्वरकों के वैकल्पिक स्रोतों पर भी विचार

खरीफ मौसम के लिए किसानों की उर्वरक आवश्यकता और उस पर संभावित प्रभाव का भी आकलन किया गया। पिछले कुछ वर्षों में उर्वरकों के पर्याप्त भंडार बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों से समय पर उपलब्धता और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी। भविष्य में निरंतर उपलब्धता बनाए रखने के लिए उर्वरकों के वैकल्पिक स्रोतों पर भी विचार किया गया।यह भी सुनिश्चित किया गया कि सभी बिजली संयंत्रों में पर्याप्त कोयला भंडार उपलब्ध होने से भारत में बिजली की कोई कमी नहीं होगी।

सरकार के सभी अंग मिलकर काम करें

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह संघर्ष लगातार बदलती स्थिति है और पूरी दुनिया किसी न किसी रूप में इससे प्रभावित हो रही है। ऐसे समय में यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए कि नागरिकों पर इसका न्यूनतम प्रभाव पड़े। प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि सरकार के सभी अंग मिलकर काम करें ताकि नागरिकों को कम से कम असुविधा हो। साथ ही उन्होंने राज्य सरकारों के साथ समुचित समन्वय बनाए रखने को कहा, ताकि आवश्यक वस्तुओं की कालाबाज़ारी और जमाखोरी न हो सके।

 

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